'भीड़ मुझे पीट रही थी, लेकिन मैंने अपना कैमरा नहीं छोड़ा, यही मेरा हथियार है' - JAGRAN9

Breaking

Home Top Ad

Responsive Ads Here

Post Top Ad

'भीड़ मुझे पीट रही थी, लेकिन मैंने अपना कैमरा नहीं छोड़ा, यही मेरा हथियार है'

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार साल 2015 से लेकर 2018 तक करीब 142 पत्रकार हमलों का शिकार हुए। वहीं साल 1992 से लेकर 2016 के बीच करीब 70 पत्रकार मारे गए।

from Jagran Hindi News - news:national http://bit.ly/2HnwqU2

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad