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राष्ट्रीय चरित्र के विकास की दरकार, समान नागरिक संहिता पर रचनात्क सोच जरूरी

देश में समान नागरिक संहिता की जरूरत या गैरजरूरत वाली सोच का लंबा इतिहास रहा है। 1928 में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में पहली बार इसकी चर्चा की गई।

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