जीवनभर बिना साथी के रहने का दर्द किन्न्रों के जीवन की भी सच्चाई है लेकिन अब वक्त बदल रहा है। इन्हें संवैधानिक तौर पर एक पहचान मिल चुकी है और अब इनके समाजीकरण का काम तेजी से हो रहा है।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2UvtSFr
जीवनभर बिना साथी के रहने का दर्द किन्न्रों के जीवन की भी सच्चाई है लेकिन अब वक्त बदल रहा है। इन्हें संवैधानिक तौर पर एक पहचान मिल चुकी है और अब इनके समाजीकरण का काम तेजी से हो रहा है।
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