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जन्नत की आरज़ू न रही, इंसान को खुदा होते देखा है...

ऐसी दुनिया में जहां सड़क पर तड़पते घायल को देख लोग आगे बढ़ जाते हैं। बेदर्द राहों पर दम तोड़ते विक्षिप्तों के लिए जहां किसी के दिल में कोई जगह नहीं।

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