उस दिन हर किसी के आंसू उलझन में थे। करें भी तो क्या एक ओर ट्रेन की बोगियों में लाशें भरी हुई निकल रही थीं तो दूजी ओर स्वाधीनता के जश्न को दिल्ली सजधज गई थी।from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2MiSLDp
उस दिन हर किसी के आंसू उलझन में थे। करें भी तो क्या एक ओर ट्रेन की बोगियों में लाशें भरी हुई निकल रही थीं तो दूजी ओर स्वाधीनता के जश्न को दिल्ली सजधज गई थी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें